पप्पू यादव पर 32 साल पहले जिसने किया था FIR ,उसी ने सरकार पर सवाल खड़ा किया
पप्पू यादव के गिरफ्तारी सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है सूचक ने ही सरकार पर सवाल खड़ा कर दिया कहा- हमने कोर्ट में आपसी सुलहनामा लगाया था
हर व्यक्ति जानना चाहता है पप्पू यादव की क्यों हुई गिरफ्तारी
अचानक पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद इस मामले के गवाह और f.i.r. करने वाले को भी हैरानी हो रही है कि आखिर 32 साल तक मधेपुरा पुलिस क्यों एक्शन नहीं ली? इस मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. अब सवाल ये भी उठता है कि खुले आम घूमने और चुनाव लड़ने के बाद भी पुलिस क्यों पप्पू को फरारी घोषित करती रही .
पप्पू यादव प्रेम विवाह करने वाले युवक व उसके एक दोस्त को कॉलेज के पास से उठाकर अपने साथ ले गए थे. इसके बाद युवक के एक दोस्त सूचक शैलेन्द्र कुमार ने मुरलीगंज थाना में अपहरण के काण्ड संख्या 9/89 दर्ज करा दिया .
जबकि एक दिन बाद दोनों अपहृत व्यक्ति खुद घर भी आ गये बाद में सामाजिक पंचायत के द्वारा सुलह कराया गया. इसके बाद मामला शांत हो गया लेकिन दर्ज मुकदमा चलता ही रहा. इस मामले में कई बार सूचक शैलेन्द्र कुमार और रामकुमार यादव तथा उमाकांत यादव के द्वारा कोर्ट में आपसी सुलहनामा भी लगाया गया ,बावजूद इसके न्यायिक प्रक्रिया भी चलता ही रहा और वर्ष 1993 पप्पू की जमानत रद्द हो गयी. इतने दिनों के बाद भी पप्पू की प्रशासनिक तौर कोई खोज खबर भी नहीं ली गयी. हद की इंतहा तो ये रही कि 22 मार्च 2021 को पप्पू के विरुद्ध वारंट/ कुर्की जारी हुआ इसके बाद भी कोई खोज खबर नहीं ली गयी और लिहाजा आज कोरोना काल में जब पप्पू यादव लोगों के लिए शहर-शहर घूम-घूम कर मदद का हाथ बंटा रहे थे तो अचानक पप्पू यादव की गिरफ्तारी हो गयी.
लोगों का भी मानना है कि पप्पू यादव को एक साजिश के तहत सरकार ने इस संकट की घड़ी में जेल भेजा है. वहीं, वहां उस समय केपी कॉलेज में शिक्षक रहे प्रो.नागेन्द्र यादव भी घटना को याद करते हैं और कहते हैं मामला तो उसी समय खत्म हो चुका था लेकिन इसे आज फिरअमल में लाना गलत है और काफी निंदनीय है.वह भी तब जब पप्पू यादव समाज की सेवा कर रहे हैं

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